आइये आपको अवगत कराते हैं एक बहुत बड़े जाने मने फिल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा जी के शुभकामनाओं वाली टिप्पणियों से /-
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रामू ने अपनी टिवीट में कहा है कि जो बालक अपना सिर कटने से नहीं बचा सका, वह औरों को मरने से किस तरह बचा पाएगा। यह मेरा प्रश्न है? लेकिन, फिर भी सभी अंधभक्तों को हैप्पी गणपति डे।
रामू इतने पर ही नहीं रूके बल्कि उन्होंने आगे लिखा है, 'क्या कोई मुझे यह बता सकता है कि गणेश आज के दिन पैदा हुए थे या फिर आज के दिन उनका सिर काटा गया था?'
'क्या भगवान गणेश अपने हाथ से खाते हैं या अपने सूंड से?'
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ये मानसिकता है एक फिल्म निर्माता की,।
अगर इनके सामने कोई कह दे कि, "भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना, पुष्प नहीं बन सकते अगर तो काँटे बनकर मत रहना" । तो तुरंत कहेंगे कि सत्य है ऐसा ही होना चाहिए, मेरे अनुमान से लगभग सभी कहेंगे।
लेकिन फिल्म वाले ये सब नहीं स्वीकारते, वे केवल लोकलुभावानता हेतु ही ऐसा ऊपर से स्वीकारते हैं। उनका चले तो किसी का तो दूर की बात है सबके लिए काँटे बनकर ही चलेंगे ।
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एक बात कहता हूँ जो अति विचारणीय है।
कुत्ते भौंकते रह जाते हैं और हाथी दुम हिलाती चली जाती है। अर्थात आप सब इसे अन्यथा न लेकर अपने कार्यकर्म पर ध्यान दें, ऐसे अवरोधकों की क्या मजाल जो आपको अवरुद्ध कर सकें !
जय श्री गणेश
जय श्री गणेश
जय श्री गणेश
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सभी ज्ञानियों से मेरा एक आग्रह और भी है कि यदि भविष्य को भाषित अथवा परिभाषित करना चाहते हैं तो आज ही फ़िल्में ना देखने का प्रण कर लो। अन्यथा इन अवरोधकों की मानसिकता और भी आपको अवरुद्ध कर सकती है।
ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति कभी भी समाजसुधारक नहीं हो सकते।
ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति समाज को दर्पण नहीं दिखाते अपितु धनों का शोषण करते हैं।
ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति संस्कारों को मिटाने का सौगंध उठा चुके हैं।
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समय आ गया है !
आइये और अब हम सब मिलकर इन्हें मिटाने का सौगंध उठा लें। कोई भी फ़िल्में दूध की धोई नहीं हैं सबका बहिष्कार करें सबको देखना बंद कर दें।
कुछ ही महीनों में ये पूरा फिल्मजगत और सेंसर बोर्ड सड़कों पर भीख माँगता नजर आएगा।
भारतीय शुभचिन्तक - अंगिरा प्रसाद मौर्या।
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जय श्री गणेश
जय श्री गणेश
जय श्री गणेश
जनहितार्थ जारी /-
!!*!! वन्दे मातरम !!*!!