जब किसी समाज में लोग अपने अधिकारों हेतु नहीं अपितु दूसरे के अधिकारों को छीनने हेतु संघर्षरत हों तो ऐसा समाज असहिष्णु समाज कहलाता है।
जब किसी व्यक्ति को बहुत प्रेम किया जाय, अधिक सम्मान मिल जाय, किन्तु वह इसे आदरपूर्वक लेने में लेने में सक्षम न हो, ऐसा ही व्यक्ति असहिष्णुता को जन्म देता है तथा उसके प्रचार में जुट जाता हैं।
------- अंगिरा प्रसाद मौर्य