शनिवार, 12 जुलाई 2014

. आज हमारे देश में न जानें क्या क्या देखो होता है राष्ट्र का निर्माण करनें वाला हर बच्चा युवा रोता है कश्मीर से कन्याकुमारी जयहिंद यहाँ सब बोलते हैं भारत माता को शर्मिंदा कर पाँव तले सब रौंदते हैं . माँ भारती का बेटा हूँ मैं सीना तान कर कहता हूँ कलम से हकीकत बयाँ करुंगा नही किसी से डरता हूँ . एक दल आता एक दल जाता कुछ होता नही कुशाषन से हर हाल में देश पीसा जाता कुछ फर्क नही अनुशाषन से पाच साल में नेता आते हैं हाँथ जोड खडे हो जाते हैं दिखा कर ख्वाब गरीबों को न जानें कहाँ खो जाते हैं . देश का हाल सुनानें को खोज में उनकी रहता हूँ कलम से हकीकत बयाँ करुंगा नही किसी से डरता हूँ . जगदीश पांडेय " दीश " .


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें